कुरआन शरीफ में इंसान के अच्छे आचरण, न्याय, दया और दूसरों के अधिकारों पर बहुत जोर दिया गया है। उदाहरण के रूप में: श्रद्धा शुक्ला
ब्यूरो रिपोर्ट आमिर मिर्ज़ा
प्रयागराज की रहने वाली और इलाहाबाद हाई कोर्ट की अधिवक्ता ने कुरान शरीफ़ के बारे में क्या बताया आइये जानते हैं:
न्याय करना — कुरआन न्याय और निष्पक्षता की शिक्षा देता है, यहाँ तक कि किसी से विरोध होने पर भी न्याय छोड़ने से मना करता है। (सूरह अल-माइदा 5:8)
माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार — माता-पिता के साथ सम्मान और भलाई करने की हिदायत दी गई है। (सूरह अल-इस्रा 17:23–24)
गरीब और जरूरतमंदों की मदद — जरूरतमंदों, अनाथों और गरीबों की सहायता करने को नेक काम बताया गया है। (सूरह अल-बक़रह 2:177)
दान और ज़कात — जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता करना इस्लामी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। (सूरह अल-बक़रह 2:267)
माफ़ करना और भलाई करना — बुराई का जवाब बेहतर तरीके से देने और माफ़ करने की प्रशंसा की गई है। (सूरह फ़ुस्सिलत 41:34)
पड़ोसियों और लोगों के साथ अच्छा व्यवहार — रिश्तेदारों, अनाथों, गरीबों और पड़ोसियों के साथ भलाई करने की शिक्षा दी गई है। (सूरह अन-निसा 4:36)
इंसानों की बराबरी — कुरआन कहता है कि इंसानों को अलग-अलग जातियों और कबीलों में इसलिए बनाया गया कि वे एक-दूसरे को पहचानें; सम्मान का आधार तक़वा/धार्मिक-नैतिकता बताया गया है। (सूरह अल-हुजुरात 49:13) जो व्यक्ति किसी सोच के लिए कट्टरवादी होते हैं दूसरे का अपमान करते हैं दूसरे धर्म का मजाक बनाते हैं उनसे बेकार व्यक्ति कोई हो नहीं सकता कोई भी धर्म किसी भी व्यक्ति को गलत बातें नहीं सिखाते ईश्वर एक संसार को चलने वाली शक्ति एक है मेरे विचार यही है एक सच्चा मुसलमान वह हो सकता है जो अच्छे आचरण लोगों के प्रति दया भाव और सम्मान करने की भावना रखें जो अपने देश के साथ वफादारी करें यही बातें कुरान शरीफ में भी बताई गई है मेरी सोच श्रद्धा शुक्ला अधिवक्ता उच्च न्यायालय इलाहाबाद।
